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राजस्थान विधानसभा में गूंजे 9800 सवाल, लेकिन गहलोत, पायलट और राजे की खामोशी पर उठे सवाल

Rajasthan Budget Session 2025: राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में 9800 सवाल पूछे गए लेकिन गहलोत, राजे और पायलट जैसे वरिष्ठ नेताओं ने एक भी प्रश्न नहीं उठाया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

राजस्थान विधानसभा में गूंजे 9800 सवाल, लेकिन गहलोत, पायलट और राजे की खामोशी पर उठे सवाल

राजस्थान विधानसभा का हाल ही में संपन्न बजट सत्र कई मायनों में खास रहा, लेकिन कुछ सवालों से घिरा भी रहा। करीब दो महीने चले इस सत्र में जहां 9800 प्रश्न विधायकों की ओर से पूछे गए, वहीं राज्य के दिग्गज नेताओं जैसे अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे, और सचिन पायलट ने एक भी सवाल नहीं उठाया। इससे यह चर्चा गर्म हो गई कि क्या अब विधानसभा की बजाय सोशल मीडिया नेताओं का नया मंच बन गया है?

31 जनवरी से 24 मार्च तक चले इस सत्र में राज्य सरकार ने 14 विधेयक पेश किए, जिनमें से केवल 10 ही पारित हो सके। इस दौरान 36 विधायकों ने 100 सवालों की तय सीमा को छुआ, जबकि अधिकांश सदस्य इससे पीछे रह गए। 14 विधायक तो 10 सवाल भी नहीं पूछ पाए।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने अपनी-अपनी पार्टियों की 20 बैठकों में से किसी में भी शिरकत नहीं की। इस पर सवाल उठने पर कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सफाई दी कि वरिष्ठ नेताओं ने शायद युवाओं को मंच देने के लिए खुद पीछे रहना चुना।

वहीं भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने वसुंधरा राजे की चुप्पी को सरकार के काम से संतुष्टि बताया। उन्होंने कहा कि बतौर पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता, राजे शायद सरकार के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं, इसलिए उन्होंने कोई सवाल नहीं उठाया।

इसके उलट भाजपा के प्रवक्ता पंकज मीना ने कांग्रेस पर हमला बोला कि उनके नेता सदन में मुद्दे उठाने की बजाय सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि वे विधानसभा में एक दिन भी नहीं आए, लेकिन ट्विटर पर रोज़ नजर आते हैं।

इस बार सदन तकनीक के नए रंग में भी रंगा दिखा। विधानसभा में पहली बार पेपरलेस कार्यवाही की शुरुआत हुई और विधायकों को आईपैड दिए गए। इसके अलावा, सदन कक्ष को गुलाबी रंग में नया रूप दिया गया, जो जयपुर की सांस्कृतिक पहचान से मेल खाता है।

बजट अनुमान 19 फरवरी को पेश किया गया और सामान्य बहस के लिए इस बार एक दिन अतिरिक्त रखा गया। कुल 96 विधायकों ने इस बहस में भाग लिया। कुल 64 अनुदान मांगों में से 17 पर चर्चा हुई और 4319 कटौती प्रस्तावों में से 3789 पर बहस की गई।