बेनीवाल के बेटे की बर्थडे पार्टी बनी सियासी सेंटर, संपर्कों की ताकत ने मचा दी सियासत में हलचल
Hanuman Beniwal Political Power: हनुमान बेनीवाल ने बेटे के जन्मदिन पर दिल्ली में सियासी हस्तियों की महफिल सजाकर दिखाया अपना राजनीतिक कद, अब अगला कदम क्या होगा, सबकी निगाहें टिकीं।

राजस्थान की राजनीति में अगर कोई चेहरा हमेशा अप्रत्याशित मोड़ों से चौंकाता है, तो वह हैं हनुमान बेनीवाल। एक बार फिर उन्होंने बिना कुछ कहे बहुत कुछ कह दिया। बहाना था बेटे का जन्मदिन, लेकिन मौका बन गया अपनी संपर्कों की ताकत दिखाने का।
25 मार्च को दिल्ली में आयोजित इस बर्थडे पार्टी में जिस तरह अलग-अलग दलों के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही, उसने सबको हैरान कर दिया। यह कोई आम समारोह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश था, वो भी बिना माइक थामे।
नितिन गडकरी से लेकर अखिलेश यादव तक, चिराग पासवान से लेकर संजय सिंह और चंद्रशेखर रावण तक—सियासत के हर रंग इस पार्टी में दिखे। जब मंच पर विरोधी खेमों के नेता हंसते-मुस्कुराते साथ नजर आए, तो ये साफ हो गया कि बेनीवाल की पकड़ सिर्फ एक पार्टी में नहीं, पूरे राजनीतिक परिदृश्य में फैली हुई है।
बेनीवाल की राजनीति की खूबी है कि उन्होंने हमेशा सत्ता और विरोध दोनों से संवाद बनाए रखा। कभी बीजेपी के साथ, तो कभी कांग्रेस के साथ चलने वाले इस नेता की रणनीति जितनी स्पष्ट बाहर से नहीं दिखती, उतनी ही मजबूत अंदर से चलती रहती है।
चार बार विधायक और दो बार सांसद बन चुके बेनीवाल का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा, ये कहना कठिन है, लेकिन इतना तय है कि वे कभी भी सियासी नज़रिए से “आउट ऑफ गेम” नहीं रहते। दिल्ली में हुए इस समारोह ने यह भी साफ कर दिया कि आने वाले चुनावों से पहले उनके पास हर दल तक पहुंच की वो कुंजी है, जो वक्त आने पर दरवाजे खोल सकती है।
अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ पारिवारिक आयोजन था या किसी नई रणनीति की झलक? क्या बेनीवाल फिर किसी बड़े मोड़ पर हैं? या फिर एक नए राजनीतिक गठजोड़ की बुनियाद रखी जा रही है?