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सिंचाई संकट पर गरमाई राजनीति, किसानों को पानी नहीं मिलने पर भारी हंगामा

राजस्थान विधानसभा में जल संसाधन और जलदाय विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान जबरदस्त बहस देखने को मिली। पानी की कमी और नहरों के मुद्दे को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गए। बीजेपी विधायक गुरवीर सिंह ने कांग्रेस पर हरियाणा को राजस्थान की नहरें देने का आरोप लगाया, तो वहीं कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार ने झुंझुनूं में पानी संकट को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए।

सिंचाई संकट पर गरमाई राजनीति, किसानों को पानी नहीं मिलने पर भारी हंगामा

राजस्थान में पानी को लेकर हमेशा बहस होती रही है, लेकिन इस बार विधानसभा में यह मुद्दा और गरमा गया। बीजेपी विधायक गुरवीर सिंह ने कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अशोक गहलोत की पिछली सरकार ने हरियाणा को राजस्थान की तीन नहरें दे दी थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री और चीफ इंजीनियर की हरियाणा में जमीनें थीं, इसलिए यह फैसला लिया गया। तो वहीं कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार ने झुंझुनूं जिले में पानी की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राजस्थान में हर मुख्यमंत्री ने अपने इलाके का विकास किया, लेकिन झुंझुनूं हमेशा पानी के लिए तरसता रहा।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना पर गरमाई बहस

विधायक अमित चाचाण ने सिंचाई और जल संकट से जुड़ी समस्याओं पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि नोहर फीडर, अमर सिंह ब्रांच, सिधमुख नहर और इंदिरा गांधी नहर परियोजना को लेकर सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने बताया कि नोहर फीडर नहर पिछले एक साल में छह बार टूट चुकी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ।

किसानों को हक नहीं मिला

चाचाण ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने नहरों की मरम्मत के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इस पर रोक लगा दी गई। इससे सिंचाई की सुविधा से 28 गांव अब भी वंचित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत से सिंचाई माफिया सक्रिय हैं, जिससे किसानों को उनके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पा रहा।

पानी के मुद्दे पर राजनीति हुई तेज

राजस्थान में पानी को लेकर राजनीति गर्म है। इसके पहले भी पानी का मुद्दा उठाया गया है, लेकिन कोई फायदा नहीं है। इसके अलावा इस मामले पर राजनीतिक बहस भी हुई, लेकिन इसका अभी तक कोई फायदा नहीं हुआ है। विधानसभा में गरमा-गरम बहस तो हो रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि आखिर पानी कब तक राजनीति का मुद्दा बना रहेगा और लोगों को इसका समाधान कब मिलेगा?