पंचायतीराज में बड़ा बदलाव! 2500 नई पंचायतें और 6000 नौकरियों की उम्मीद
राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं का पुनर्गठन जून तक होगा अंतिम। जानिए कितने नए पद सृजित हो सकते हैं और किसे मिलेगा राजनीतिक और रोजगार का लाभ।

राजस्थान की राजनीति और ग्रामीण प्रशासन के गलियारों में इन दिनों एक नई हलचल महसूस की जा रही है। कारण है त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं का पुनर्गठन और नवसृजन। इस प्रक्रिया के चलते जहां एक ओर सरपंच, प्रधान, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य बनने के इच्छुक लोग राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर बेरोजगार युवाओं की निगाहें भी सरकार की इस कवायद पर टिकी हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस पुनर्गठन के तहत करीब 2500 नई ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचे हैं। वर्तमान में इन प्रस्तावों पर आम जनता और संबंधित अधिकारियों से आपत्तियां आमंत्रित की जा रही हैं। जून माह में इन पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिसके बाद पंचायतों की सीमाएं तय होंगी और नए प्रशासनिक ढांचे का गठन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पुनर्गठन के बाद करीब छह हजार नए पद पंचायतीराज विभाग में सृजित हो सकते हैं, जिनमें ग्राम सेवक, पंचायत सहायक, कनिष्ठ लिपिक, और तकनीकी सहायकों जैसे पद शामिल होंगे। इसका मतलब है कि न सिर्फ राजनीति में नए चेहरे सामने आएंगे, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के द्वार भी खुल सकते हैं।
राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और संभावित उम्मीदवार पहले से ही क्षेत्र विशेष में सक्रिय हो गए हैं। जो नेता पहले पंचायत समिति या जिला परिषद सदस्य थे, वे नए परिसीमन में अपनी संभावनाएं टटोल रहे हैं। वहीं युवाओं में इस बात की उम्मीद जगी है कि अब उन्हें गांव में रहकर भी सम्मानजनक सरकारी नौकरी मिल सकती है।
इस समूची प्रक्रिया का सीधा असर ग्रामीण विकास योजनाओं पर भी देखने को मिलेगा। छोटे गांवों को अपनी अलग पंचायत मिलने से योजनाओं का कार्यान्वयन अधिक प्रभावशाली हो सकता है।