Trendingट्रेंडिंग
विज़ुअल स्टोरी

Trending Visual Stories और देखें
विज़ुअल स्टोरी

वर्दी में छल: दो आधार कार्ड लेकर परीक्षा देने पहुंची महिला कांस्टेबल, अब जेल में पहुंची

Dual Adhar Card Fraud: राजस्थान की RO और EO परीक्षा में उस वक्त सनसनी फैल गई जब कोटा में परीक्षा केंद्र पर एक महिला कांस्टेबल दो अलग-अलग आधार कार्ड लेकर परीक्षा देने पहुंची। जांच में खुलासा हुआ कि दोनों आधार में जन्मतिथि और आधार नंबर अलग-अलग थे। आरोपी की पहचान अंजली सिंह के रूप में हुई, जो कोटा पुलिस लाइन में तैनात है। एडीएम प्रशासन की निगरानी में महिला को परीक्षा देने दी गई, लेकिन बाद में पुलिस को सौंप दिया गया। 

वर्दी में छल: दो आधार कार्ड लेकर परीक्षा देने पहुंची महिला कांस्टेबल, अब जेल में पहुंची

राजस्थान में एक बार फिर परीक्षा प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। इस बार मामला सिर्फ नकल या तकनीकी हेरफेर का नहीं, बल्कि वर्दीधारी भरोसे का भी है। कोटा में रेवेन्यू ऑफिसर (RO) और एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) की परीक्षा के दौरान एक महिला कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया, जिसने दो अलग-अलग आधार कार्ड के सहारे परीक्षा देने की कोशिश की।

जब भरोसे की वर्दी में मिली फरेब की परत
गुमानपुरा के महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल में जब वह परीक्षा देने पहुंची, तब किसी को अंदेशा भी नहीं था कि उसके इरादे इतने दोहरे होंगे। लेकिन दस्तावेज़ जांच के दौरान जब दो आधार कार्ड सामने आए, जिनमें जन्मतिथि और आधार नंबर अलग-अलग थे, तो सेंटर प्रभारी ने तुरंत इसकी सूचना परीक्षा समन्वयक और एडीएम प्रशासन मुकेश चौधरी को दी। महिला को परीक्षा देने की अनुमति तो मिली, पर परीक्षा खत्म होते ही उसके दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए।

वर्दी के पीछे छिपी पहचान
महिला का नाम अंजली सिंह है, जो कोटा पुलिस लाइन में तैनात है। जब खुलासा हुआ कि एक पुलिस कांस्टेबल ही इस तरह के जाल में शामिल है, तो पूरे महकमे में हलचल मच गई। गुमानपुरा थाना पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। यह सिर्फ एक नियम उल्लंघन नहीं, बल्कि उस संस्थान पर भी सवाल है, जिसकी नींव ही अनुशासन और ईमानदारी पर टिकी होती है।

पेपर लीक की पृष्ठभूमि से आई सख्ती
यह परीक्षा पहले अक्टूबर 2024 में आयोजित की गई थी, लेकिन एसओजी और एटीएस की रिपोर्ट के बाद नकल और तकनीकी घोटाले के चलते इसे रद्द करना पड़ा। 23 मार्च को फिर से परीक्षा कराई गई, जिसमें पारदर्शिता और सुरक्षा के हर मापदंड का पालन किया गया। लेकिन इस बार धोखा तकनीक से नहीं, बल्कि पहचान की परतों से आया।