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Rajasthan: रीको को भूमि अधिग्रहण का अधिकार: सरकार का नया कदम या किसानों के हितों पर आघात?

राजस्थान में भूमि अधिग्रहण विधेयक पर सियासत तेज हो गई है। सरकार ने रीको को भूमि अधिग्रहण का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है। जानें इस मुद्दे पर सभी पक्षों की राय।

Rajasthan: रीको को भूमि अधिग्रहण का अधिकार: सरकार का नया कदम या किसानों के हितों पर आघात?

जयपुर। प्रदेश में इन दिनों सरकार द्वारा पारित कराए जा रहे बिलों पर सियासत जारी है। ऐसे में एक बार फिर भूमि अधिग्रहण सुधार फिर से चर्चा में आ गया है। सरकार ने इसके बिजनेस के लिए जमीन का अधिग्रहण का अधिकार रीको यानी राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश लिमिटेड को देने का फैसला किया गया है। जिसका प्रस्ताव भी कमेटी को भेजा जा चुका है। सरकार के इस फैसले का विपक्ष विरोध कर रहा है। विपक्षी विधायकों का कहना है,इस प्रस्ताव सरकार गरीबों का हित छीनने का काम कर रही है। वहीं, विपक्ष के बयानों पर अब यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अपना रिएक्शन दिया है। 

क्या बोलें झाबर सिंह खर्रा 

झाबर सिंह खर्चा ने कहा, ये फैसला अभी का नहीं बल्कि पहले का है। राइजिंग राजस्थान के दौरान सरकार ये फैसला कर चुकी थी। सरकार ने प्रदेश में विकासऔर निवेशों को बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया था। जिन सुधारों की जरूरत है, उसके लिए सरकार विधेयक लाएगी। हमारी कोशिश है, राज्य में मौजूद खनिजों का सही इस्तेमाल कर आर्थिक विकास को गति दी जा सके। 

खर्रा यहीं नहीं रूके, उन्होंने आगे कहा कि कमेटी संग विचार-विमर्श के बाद ही ये बिल लाया गया है। सदन में जो भी प्वाइंट्स निकलकर सामने आए हैं। उनपर विचार करने के लिए हम प्रतिबद्ध है। बिल पारित होने के बाद अभी यदि कही से प्रतीत होता है, जो किसानों के हित में नहीं है। उसे तुरंत सुधारा जाएगा। 

टीकाराम जूली ने साधा निशाना

वहीं, इस पर टीकाराम जूली ने निशाना साधते हुए कहा, सरकार रीको के बहाने आम जनता का हित छीनना चाहती हैं। रीको ने कई इंडस्ट्रियल एरिया कम पैसों में कंपनियों को सौंप दी। जिनकी कीमत आज दस गुना ज्यादा हो गई है। अब ये कंपनियां यहां पर प्लाटिंग करके मॉल,फ्लैट बनाएंगी लेकिन किसानों को क्या मिला। इस पर विचार करने की जरूरत है।