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जौहर मेला 2025: चित्तौड़गढ़ की पवित्र धरती पर आज पहुंचेंगे CM भजनलाल शर्मा, वीरांगनाओं को देंगे श्रद्धांजलि

Bhajan Lal Sharma Chhitorgarh Visit: चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक दुर्ग में चल रहे जौहर मेला 2025 का आज समापन समारोह है, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और अन्य जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। मुख्यमंत्री सुबह 11:05 बजे हेलीकॉप्टर से पहुंचेंगे और दो घंटे तक जौहर स्थल पर रहकर वीर-वीरांगनाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। शोभायात्रा, हवन और पूर्णाहुति के साथ मेले का समापन होगा

जौहर मेला 2025: चित्तौड़गढ़ की पवित्र धरती पर आज पहुंचेंगे CM भजनलाल शर्मा, वीरांगनाओं को देंगे श्रद्धांजलि

राजस्थान की शौर्य भूमि चित्तौड़गढ़ में आज का दिन गौरव, बलिदान और नारी सम्मान की भावना से ओतप्रोत होने वाला है। जौहर मेला 2025 के अंतिम दिन आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में खुद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा शिरकत करने वाले हैं। उनके साथ केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, और अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

हेलीपैड से जौहर स्थल तक भावनाओं की यात्रा
मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर सुबह 11:05 बजे चौगानिया स्थित पद्मिनी महल के समीप हेलीपैड पर उतरेगा। इसके बाद वे सीधे जौहर स्थल पहुंचेंगे। वहां लगभग 2 घंटे 5 मिनट तक वे जौहर श्रद्धांजलि समारोह में उपस्थित रहेंगे और वीर-वीरांगनाओं को नमन करेंगे। श्रद्धांजलि के बाद वे जयपुर के लिए रवाना होंगे।

शोभायात्रा से पूर्णाहुति तक—हर पल में जुड़ी है परंपरा
जौहर मेला का समापन दिन न सिर्फ ऐतिहासिक होता है, बल्कि भावनात्मक भी। आज इंदिरा गांधी स्टेडियम से लेकर दुर्ग स्थित जौहर स्थल तक एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन और पूर्णाहुति का आयोजन होगा। यह न केवल परंपरा का निर्वाह है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम भी।

जौहर ज्योति मंदिर: जहां वीरांगनाओं की आत्मा बसती है
जिन तीन वीरांगनाओं ने चित्तौड़ की अस्मिता की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति दी—रानी पद्मिनी, राजमाता कर्णावती और फूलकंवर मेड़तणी—उनकी प्रतिमाएं आज जौहर ज्योति मंदिर में विराजमान हैं। यह मंदिर किले की तलहटी में स्थित जौहर भवन में बना है, और यहां हर साल हजारों श्रद्धालु नारी सम्मान को नमन करने पहुंचते हैं।

1948 से चला आ रहा है यह यज्ञ
जौहर मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, यह स्वाभिमान का त्योहार है। इसकी शुरुआत 1948 में ओरड़ी के ठाकुर कल्याण सिंह के नेतृत्व में एक यज्ञ के रूप में हुई थी। 1986 में इसे औपचारिक रूप से "जौहर मेला" नाम दिया गया। तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धा, संस्कृति और इतिहास एक साथ गूंजते हैं।